अलविदा अवसाद

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हे  प्रभु , मुझे  धैर्य  दीजिये ताकि  मैं  उन  चीजों  को स्वीकार  कर  लूँ , जिन्हें  मैं  नहीं बदल  सकता हूँ ; मुझे  शक्ति  दीजिये ताकि जिन्हें  मैं बदल सकता  हूँ , उन्हें बदल  दूँ  और  मुझे  सद्बुद्धि  दीजिये  ताकि  मैं दोनों  में  अंतर्  समझ  सकूँ। 

                                                                                                                       अज्ञात

 
 
अवसाद आस्तीन का साँप होता है। यह कब डँस लेगा , कोई नहीं जानता है। अनेक बार तो यह डँस भी लेता है और शिकार को पता भी नहीं चलता है। इसका शिकार तड़प-तड़प कर प्राण त्याग देता है। यह खुंखार शैतान आपको अपने कब्ज़े में ले, उसके पहले ही इसे पटक -पटक  कर  मार  डालें। 
 
लचकने वाले व्यायाम, तेज रफ्तार टहलना और प्रेरणादायक /धार्मिक साहित्य का पठन-पाठन  अवसाद को काफी  हद तक नष्ट कर देते हैं। 
 आस्तिक इस  खतरनाक आधि के शिकार नहीं होते हैं, क्योंकि जो भी घटित होता है, उसे ईश्वर की इच्छा मानकर वे सहर्ष स्वीकार कर लेते हैं।
 
भूतकाल के सुखद क्षणों के बारे में चर्चा करने से और उन्हें पुनः जीने से अवसाद दूर रहता है। उन सभी वस्तुओं से  भी दूर रहिये, जो किसी दुर्घटना की याद दिलाकर आपको दुखी बनाते हैं।
हँसने और ताली बजाने के अवसर खोजते रहिये . इस तरह भी जब मौका मिले, हथेलियों और उँगलियों को एक दूसरे से पूर्ण स्पर्श कराकर दस-बीस बार ताली बजाइए .
पूरी श्रद्धा से निम्नलिखित मुहावरों/श्लोकों को दुहराने से अवसाद आपको प्रभावित नहीं कर पायेगा। ” 


1. कर्मण्येवाधिकरस्ते मा फलेषु कदाचना।  मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते सङ्गोस्त्वकर्मणि। 

अर्थात   कर्म करना हमारा अधिकार है, फल देना ईश्वर का अधिकार है और ईश्वर जो भी फल देंगे, उसे हम सहर्ष स्वीकार करेंगे और भविष्य में भी पूरी तन्मयता से कर्म करते रहेंगे।
2 . बीती ताहि बिसारिये, आगे की सुधि लीजिये। 
3. हम सुधरेंगे, सँसार सुधरेगा ; वर्तमान साधेंगे, ब्रह्माण्ड सधेगा। 
4. अग्रसोची  सदा सुखी। 

जिम रॉन ने कहा है,” जो आपके पास है, उससे खुश रहिये और जो चाहते हैं उसके लिए अनवरत प्रयत्नरत रहिये। “
उपरोक्त का आप जितना ज्यादा अभ्यास करेंगे, उतनी ही गहराई से ये बातें आपके अवचेतन में पैठ जायेंगी। 

यदि सारे उपायों के बावजूद किसी को अवसाद घेर ले तो वह अपने मित्रों और निकट संबंधियों से निस्संकोच मशविरा करे क्योंकि शत्रु पहचाने जाने के बाद  कम खतरनाक रह जाता है। अवसाद ज्यादा गहरा और खतरनाक हो तो चिकित्स्क से अवश्य परामर्श लें। अवसाद का शत-प्रतिशत ईलाज होता है, वशर्ते कि आप इसे शीघ्र पहचान कर  तत्क्षण इस पर हमला कर  दें .

अवसाद एक  गंभीर बीमारी है, इसके शिकार के साथ पूरी सहानुभूति रखें और उसकी भावनाओं को समझने की पूरी कोशिश करें। 
अवसादग्रस्त व्यक्ति मुफ्त  गैर चिकित्सीय परामर्श हेतु मुझे info.mytruedreams@gmail.com पर लिख सकते हैं।  यह परामर्श बिना किसी शुल्क और जिम्मेवारी के दी जाएगी। 

अब  परिवार के सदस्यों के साथ अपने  जीवन  की  सबसे  सुखद  पारिवारिक घटना  याद  करें  और  उसका  वर्णन  ज्यादा से  ज्यादा  शब्दों  में  करें।  याद  करें  आपके  साथ  कौन  लोग थे? क्या बातें  हो रही  थीं ? भोजन  में  क्या-क्या  पड़ोसा  गया था ? क्या गाने-बजाने  का भी  कार्यक्रम  था ? अब  इन सुखद  यादों  को  अपने  मित्रों  से साझा  करें  या  उन्हें  कोई अच्छा  चुटकुला  सुनाएँ।  मुझे  पूरा  विश्वास है कि आप खुद अंतर  महसूस करने  लगेंगे। 



 
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