कल्पना करने में कंजूसी त्यागें; भव्य कल्पनायें कर भाग्य संवारें.

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कल्पना में कंजूसी करनेवालों का वास्तविक जीवन भी अभाव-ग्रस्त रहता है. जो झोपड़ी बनाने की कल्पना करते हैं, वे कभी विशाल अट्टालिका नहीं बना सकते हैं. कल्पनाशील और उद्यमी लोगों ने ही वनों और गुफाओं में रहने वाले मानव जाति को चाँद-सितारों की ऊंचाई पर पहुँचा दिया.”

Manhattan New York New York City

एक व्यक्ति दायें हाथ में रोटी लेकर बायीं हथेली में सटाकर खा रहा था। उसके साथी ने यह देखकर घोर आश्चर्य व्यक्त करते हुए पूछा,” भाई, तेरी बाँयी हथेली खाली है, फिर तू बार-बार बायीं हथेली में रोटी सटाकर क्यों खा रहे हो ? रोटी खा रहे व्यक्ति ने अत्यंत दुःखद उत्तर दिया,” मैं कल्पना कर रहा हूँ कि मेरी बायीं हथेली में नमक है और मैं नमक-रोटी खा रहा हूँ। ” उसके साथी ने सदमा में माथा ठोकते हुए कहा,” मूर्ख! अगर तुझे कल्पना ही करनी है तो कल्पना कर कि तेरी बायीं हथेली पर मलाई है और तू मलाई-रोटी खा रहा है। 

परिवार के  किसी भी व्यक्ति के घर आने में देरी होने पर माँ घबराने लगती थी. एक बार पिताजी देरी से आये , माँ  घबराई हुई थी ; उनके  मन में  भयानक  विचार  आ  रहे थे जब कि पिताजी होली की खरीददारी करने में व्यस्त थे। 

मिथिला  में  अनेक श्रद्धालु विश्वास करते हैं  ,”इच्छा  देवी  हर  पल  विचरण  करती  रहती  हैं , वे  जिधर  भी  जाती  हैं , लोगों  की  इच्छाएं  पूरी  कर  देती  हैं।  अतः जो जैसा  सोचता और  बोलता  है , वैसा  ही  पाता  है।  लोकप्रिय कहावत  “मंशे  फल  नियते  बरक्कत ” भी  इस  धारणा  की  पुष्टि  करती  है। 

भव्य कल्पनायें करें.

जब कल्पना ही करनी है तो भव्य कल्पनायें करें. अगर मैं परीक्षा में  फेल हो जाऊं तो क्या होगा के बदले यह सोचें कि मैं परीक्षा में  टॉप कर जाऊं तो क्या होगा. अगर मैं बीमार पड़ जाऊं तो क्या होगा के बदले यह सोचें कि  मैं एक सौ साल स्वस्थ जीउँ तो क्या होगा. अगर मेरे मित्र मुझे धोखा दे दें तो क्या होगा के बदले यह सोचें कि मेरे शत्रु भी मेरा सहयोग करने लगें तो क्या होगा. यद्यपि अवांछित घटनाओं हेतु भी योजना बनानी पड़ती है, लेकिन अधिकांश मानसिक उर्जा सकारात्मक सोचों में लगाये. आप जैसी कल्पना करेंगे, वैसा ही परिणाम आपको मिलेगा. हर पल अपना दुःख रोने वालों पर सचमुच  दुखों का पहाड़ टूट पड़ता हैं. सकारात्मक सोच रखने वालों और सकारत्मक बातें करने वालों के जीवन में अच्छी बातें होती रहती हैँ। 

आप अपने कार्यालय, परिवार या मुहल्ले में  दोनों  प्रकार  के  पांच या दस लोगों की सूची बनाकर आप खुद परख सकते हैं। मेरी रचना अपना मस्तक ऊँचा रखें. भी अवश्य पढ़ें. 

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