किसने रखा है? हमारा रिमोट कंट्रोल 

316

 

अपने मस्तिष्क का रिमोट कंट्रोल किसी दूसरे को नहीं दें. किसी और को अपना मुड बदलने की अनुमति नहीं दें.

 

 

 

मुझे वे दिन याद हैं, जब चैनल बदलने के लिये लोग दौड़-दौड़ कर टेलीविज़न के पास जाते थे. रिमोट कण्ट्रोल आने से जिन्दगी आसान हो गयी. आप फिल्मी गाने का आनन्द ले रहे हैं, और समाचार देखने की इच्छा हुई, तुरत बटन दबाया और न्यूज़ चैनल पर चटपटे समाचार आने लगे. समाचारों से जी भर गया तो फिर जैसे ही बटन दबाया आपकी मनपसन्द फिल्म आने लगती है.

हमारे मुड के साथ भी यही होता है. कोई व्यक्ति आकर कहता है,” साहब! आपके जैसा नेक इंसान मैंने कभी नहीं देखा, आप तो साक्षात् ईश्वर के दूसरे रूप हैं. बस फिर क्या! हमारे तो पाँव ही जमीन पर नहीं पड़ते हैं. हम सातवें आसमान में उड़ने लगते हैं. जालसाज इसी कमजोरी का लाभ लेकर हमें कई बार ठग भी लेते हैं.

दूसरा व्यक्ति भौहें चढाये आता है और चिल्लाकर कहता है,” आपके जैसा आलसी कहीं नहीं देखा. एक घंटे से मैं खड़ा हूँ, आप मेरा काम नहीं कर रहे हैं. बस फिर क्या! हम लड़ने पर आमादा हो जाते हैं. कार्य-स्थल पर तो दिन भर खीझ बनी ही रहती है, घर आकर बीबी-बच्चों पर भी गुस्सा उतारते हैं. यही नहीं सपनों में भी उसकी ऐसी-तैसी करते रहते हैं.

हमें आत्म-मंथन करने की आवश्यकता है कि क्या हमारे मस्तिष्क और मूड का रिमोट कण्ट्रोल दूसरे रखेंगे?

क्या दूसरे जब चाहें हमें खुश कर देंगे या जब चाहें हमें दुखी या क्रोधित कर देंगे.

महात्मा गाँधी कहते थे,” मेरी मर्जी के बिना मुझे कोई ठेस नहीं पहुंचा सकता है.” अतः हमें भी अविलम्ब अपना रिमोट कंट्रोल दूसरों से छिनकर सुरक्षित स्थान पर रख लेना चाहिए, जहाँ यह किसी के भी हाथ न लग पाये.

कृपया अपने गतिशील विचारों को टिप्पणी-बॉक्स में डालकर हमें भी अनुगृहित करें.

शेयर करें

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here