व्यायाम करें, कहीं भी और कभी भी: स्वस्थ रहें हरदम.

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व्यायाम द्वारा सातों दिन और चौबीसों घन्टे सक्रिय  रहिये. इस लेख को बार-बार पढकर अपने अवचेतन मन में बैठा लेंगे तो  स्वतः आप इन गतिविधियों को करने लगेंगे.

 

  अपने शरीर का ध्यान रखें, यही वह स्थान है, जहाँ आप रहते हैं.

                                                                                  —-      जिम रोन

आम अवधारणा है कि आप सुबह खाली पेट या फिर शाम में भोजन के  दो घंटे पश्चात ही व्यायाम कर सकते हैं। लेकिन, दिन भर बच्चों की तरह सक्रिय रहना आपके स्वास्थ्य के लिए राम-बाण होगा।

उम्र बढ़ने के साथ-साथ जोड़ों का जाम होना बड़ी समस्या पैदा करता है। यह दर्ददायक होने के साथ-साथ  नित्य-कर्म में भीषण कठिनाई का कारण बन जाता है। आप दिन में कभी भी निम्नलिखित व्यायाम करके लाभ उठा सकते हैं.

गर्दन को लचीला रखने वाले व्यायाम 

1. अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे प्रत्येक घंटे में दो-तीन बार छत की ओर देखें। गर्दन झुकाकर लिखने-पढ़ने वालों के लिए यह लाभदायक है। योगासन पद्धति के अनुसार एक मुद्रा के उलटी मुद्रा कराई जाती है। जैसे यदि आप आगे झुकने वाले आसन करते हैं तो फिर आपको पीछे झुकने वाले आसन करने की सलाह दी जाती है। इसी तरह यह व्यायाम गर्दन झुकाकर कार्य करने से होने वाले spondilitis आदि दुष्परिणामों का शमन करता है। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है।

2.  जब भी मौका मिले गर्दन को 90 डिग्री दाहिने, फिर 90 डिग्री बायें घुमाएँ। ऐसा दिन में दस से बीस बार तक करें।

कन्धों को स्वस्थ रखने वाले व्यायाम

  1.  अपने दोनों हाथों को सिर के ऊपर ले जाकर हथेलियों को स्पर्श करें. फिर दोनों हाथों को नीचे लाकर जांघों के बगल में स्पर्श करें. ऐसा तेजी से पांच-दस बार करें.
  2. दोनों हाथ पीठ के पीछे ले जायें, फिर उन्हें ऊपर गर्दन की ओर ले जाने का प्रयास करें . ऐसा पांच-दस बार करें.

उपरोक्त व्यायाम आपके कंधों को स्वस्थ रखते हैं और फ्रोजेन शोल्जर नामक बीमारी से बचाते हैं . इस बीमारी में कंधे जाम होने लगते हैं. परिणामस्वरूप हाथों को हिलाने में दर्द होता है. रोगी दर्द से बचने के लिए हाथों का मूवमेंट नहीं करता है, जिससे कंधे और जाम हो जाते हैं. मेरे चिकित्सक ने मुझे हाथों को हिलाने वाले अनेक तरह के व्यायाम बताये थे, जिनको छह महीने से ज्यादा करने पर मुझे फ्रोजेन शोल्जर से छुटकारा मिला.

अन्य व्यायाम

  1. हाथ की उँगलियों को यथासम्भव फैलायें. फिर दोनों मुठ्ठियाँ कसकर बांधें.
  2. मुट्ठियाँ बांधकर उन्हें घड़ी की दिशा और विपरीत दिशा में वृताकार घुमायें.
  3. बैठे-बैठे पैरों के पंजों को ऊपर उठायें, फिर उन्हें नीचे रखकर एड़ियों को ऊपर उठायें.
  4. पैरों की उँगलियों को यथासम्भव मोड़ें, फिर उन्हें सीधा करें.
  5. खुलकर हँसने और ताली बजाने के अवसर खोजें. ताली बजाते समय हथेलियों और उँगलियों को एक दूसरे से स्पर्श करायें.

उपरोक्त सभी व्यायाम दस-बीस बार सहजता से करें.

जहाँ सम्भव हो बैठने के बदले कुछ मिनट खड़ा रहें.

समतल जमीन पर छोटी दूरियां तेजी से टहलते हुए जायें. उबड़-खाबड़ रास्तों पर पर्याप्त सावधानी बरतें.

मुंह धोते समय एक-एक मिनट क्रमशः दाहिने तथा बाएं पैर पर खड़े रहने का अभ्यास करें .

सारांश यह है कि प्रत्येक पल अपने शरीर के अंगों को सक्रिय रखने का अभ्यास करें और शरीर के सारे जोड़ों को यथासम्भव हिलाते रहें.

साथ-साथ नित्य सबेरे आधा घंटा तेज टहलना और योगासन करना न भूलें. मेरे प्रिय योगासन निम्नलिखित हैं.

ताड़ासन, उत्थान पादासन, भुजंगासन, शलभासन, शशांकासन और मर्जरी आसन.

समस्या रहित यात्रा  के लिए आप अपने कार और बाइक का नियमित रख-रखाव  करते  हैं. आप कार लेकर कहीं निकलते हैं तो ध्यान रखते हैं की  उसमें कोई खरोंच न लग जाये .कार में आप अच्छी गुणवत्ता वाला  पेट्रोल भरवाते हैं .

इसी तरह अपने  शरीर के रख-रखाव हेतु कुछ घंटे प्रतिदिन अवश्य निकालें  और  चौबीसों घंटे सातों दिन इसका ख्याल रखें , क्योंकि कार या  बाइक खराब हो गई तो आप नई खरीद लेंगे, लेकिन जीवन-यात्रा के लिए हमें तो बस यही  एकमात्र शरीर मिला है, यदि इसमें खराबी आएगी तो हमें दूसरा शरीर नहीं मिलेगा. कृप्या मेरी यह रचना भी अवश्य पढ़ें.Real wealth is Robust Wealth.

उपरोक्त विधियाँ आपके शरीर को स्वस्थ और मस्तिष्क को चुस्त रखने में अवश्य सहायता करेंगी . लेकिन ये सुझाव बिना किसी जिम्मेदारी के दिए जा रहे हैं. इन्हें प्रारम्भ करने के पहले यदि आवश्यक समझें तो किसी विशेषज्ञ से अवश्य सलाह ले लें.

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