सुसंस्कारों का अभेद्य किला बनायें।

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प्राचीन काल के सम्राट अपने राज्य की सुरक्षा के प्रति काफी सजग रहते थे. वे अपने राज्य के चारों ओर सुंदर और सुदृढ़ किले बनवाते थे। किले की ऊँची और मजबूत दीवारों से टकराकर शत्रु के तीर निष्प्रभावी  हो जाते थे। प्रशिक्षित बहादुर लड़ाके हर पल किलों की सुरक्षा में तैनात रहते थे और शत्रु को देखते ही वे उस पर टूट पड़ते थे। इसी तरह नकारात्मक विचारों से बचने के लिए हमें भी अपने मस्तिष्क के चारों ओर सुसंस्कारों का अभेद्य किला बनाने की आवश्यकता है।

सुसंस्कारों का अभेद्य किला कैसे बनाएं?

सकारात्मक विचारों वाले व्यक्तियों से मित्रता करें. धार्मिक और प्रेरक साहित्य भी नियमित रूप से  पढ़ते रहें.शनै-शनै आपके मस्तिष्क के चारों ओर सुसंस्कारों काअभेद्य किला बनना प्रारम्भ हो जायेगा।
सकारात्मक विचारों के लगातार प्रहार से नकारात्मक विचार निष्प्रभावी हो जाते हैं। अतः नकारात्मक विचार जब भी आक्रमण करें तो आप उन्हें निम्नलिखित शक्तिशाली  नारों से नेस्तनाबूद कर दें।
2. मीरा ने पिया विष का प्याला, विष को अमृत कर डाला।
3. अग्रसोची, सदा सुखी।
4. जो हुआ अच्छा हुआ; जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है; जो होगा वह भी अच्छा ही होगा। तुम भूत का पश्चाताप मत करो, भविष्य की चिंता न करो. देखो, अभी वर्तमान चल रहा है.
मैं इन नारों को दुहराते हुए अपनी ऊँगली का एक पोर भी हल्के से दबाता रहता हूँ। यह एंकर जैसा कार्य करता है. जब भी नकारात्मक विचारों के हमले के दौरान मैं नारों को दुहराने की स्थिति में नहीं रहता हूँ तो सिर्फ ऊँगली का वह विशेष पोर हल्के से दबाता हूँ, अवचेतन मन संबंधित नारा स्वतः  दुहराने लगता है और मैं नकारात्मकता से मुक्त होने लगता हूँ.
एंकरिंग और आवृत्ति का सिद्धांत अत्यंत ही शक्तिशाली होता है. इसका पूर्ण दोहन कर आप सुस्न्कारों का अभेद्य किला बनायें. यह आपको अवसाद और नकारात्मकता से सर्वदा मुक्त रखेगा.
कृप्या अपने गतिशील विचार टिप्पणियों के बॉक्स में डालकर हमें भी अनुगृहित करें.
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