सड़े विचार जला दें; नये उत्साहवर्धक विचार अपनायें.

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सड़े विचार खदेड़ भगाने  और उत्साहवर्धक विचार मनो-मस्तिष्क में स्थापित करने के सरल टिप्स जानें.

जान-लेवा दुर्गन्ध से बचने के लिए हम अपने प्यारे सगे-सम्बन्धियों के शव अविलम्ब दफना देते हैं. दुर्भाग्यवश, सड़े विचार हम प्राणों से चिपका कर रखते हैं. परिणामस्वरूप, उनकी सड़न हमारा जीना दुश्वार कर देती है.

हमारा मस्तिष्क किसी विशेष परिस्थिति में विशेष ढंग से प्रतिक्रिया देना सीख लेता है. बचपन में मैं बहुत शरारती था, अतः मेरी माँ धमकाती रहती थी,” पापा को आने दो, तुम्हारी धुलाई कराती हूँ. कभी-कभी पापा मेरी जम कर पिटाई कर देते थे. अतः माँ जब भी धमकाती थी, मेरे मन में अपशकुनी डर समा जाता था और नाना प्रकार के डरावने विचार मस्तिष्क में कौंधने लगते थे. यद्यपि अब नियंत्रक बदल गये हैं, लेकिन जब भी मैं कोई साहसी कदम उठाता हूँ, मेरे मन में नियंत्रकों द्वारा उठाये जाने वाले भांति-भांति के डरावने काल्पनिक विचार आने लगते हैं. अतः बचपन से चले आ रहे नकारात्मक सोचों को दिमाग से खदेड़ने के लिए मैं लगातार दोहराता रहता हूँ,” सड़े विचार जला दें, सड़े विचार जला दें.”

बचपन में मैं काफी दुबला-पतला था. अतः मैं विद्यालय के दादाओं को अक्सर सुनाया करता था,” हम अपनी आज़ादी को हरगिज़ मिटा सकते नहीं, सर कटा सकते हैं, लेकिन सर झुका सकते नहीं.”  सेना के एक जनरल ने कुछ वर्षों पहले इंटरव्यू दिया था. उनका कहना था कि वे अपने दुश्मनों से बेइन्तहां प्यार करते हैं और उन्हें अविलम्ब जन्नत भेज देते हैं. जहाँ पहला विचार शहीद होने की मानसिकता को मजबूत करता है, वहीं दूसरा विचार शत्रुओं को शहीद करके विजयलक्ष्मी प्राप्त करने की ओर प्रेरित करता है. यद्यपि आम जीवन में इन विचारों का सांकेतिक उद्देश्य ही होता है.

सड़े विचार भगाने का आसान तरीका 

 मैंने मात्र आधे घंटे में मस्तिष्क से सड़े विचार खदेड़ दिया.

  उद्विग्न अवस्था में मैं एक सुबह बिस्तर से उठा. पूर्व रात्रि मैं प्रसन्न-चित्त अवस्था में सोने गया था. सिर्फ सात-आठ घंटों के दौरान कौन सा पहाड़ टूट गया था? मैनें देखा कि शयन-कक्ष की सभी खिड़कियाँ बंद थीं. अतः कमरे में ऑक्सीजन की कमी थी. मैंने पहले कुछ खिड़कियाँ खोल दीं, फिर बरामदे में रखी व्यायाम वाली साइकिल चलाने लगा. लगभग आधे घंटे चलाने के बाद मैं पुनः तरो-ताजा और प्रसन्न-चित्त महसूस करने लगा.

सड़े विचार भगाकर नये उत्साहवर्धक विचार लगायें।

 हम वैसे ही बन जाते हैं, जैसा सोचते हैं. अतः मस्तिष्क के सड़े-गले विचारों को जलाकर वहाँ नये और प्रगतिशील विचार स्थापित करें. विश्वास की शक्ति का लाभ उठायें. अपने बारे में अच्छी बातें सोचें और लोगों को दर्शायें. अपनी क्षमताओं और सद्गुणों के बारे में अपने घनिष्ठ मित्रों से बात करें और उन्हें विस्तारित करने की रणनीति बनाएं।इस सम्बन्ध में मेरी रचना नव वर्ष प्रतिदिन मनायें.  भी अवश्य पढ़ें.

उत्साहवर्धक सकारात्मक विचार अपनाकर आप नये उत्साह और नये जोश के साथ द्रुत गति से अपने मनचाहे लक्ष्यों की ओर बढ़ते नजर आयेंगे.

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